धुंधला सा वो आइना था
या धुंधली थी वो छवि
उसके अक्स को थी मैं खड़ी ढूँढती
आज पल भर में वो आइना
है जैसे घुल सा गया
तुम मिले.. हम मिले...
कोई अपना मिल गया॥
ख्यालों में कैद हैं
तेरी बाहों में कैद हैं
मेरे खवाबों को जैसे
नया आसमां मिल गया॥
तुझमें ही खो के
हैं तुझको ही ढूँढा
तेरा प्यार जो मिला
मुझे जहाँ मिल गया ॥
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